अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर भीषण हमले का आज तीसरा दिन है। इसके जवाब में ईरान ने कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में टकराव बढ़ गया है। मिडिल ईस्ट के देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं। कई देशों ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है। शनिवार के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका-इज़रायल ने रविवार को भी ईरान में कई जगहों पर जोरदार हमले किए और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर बम गिराए और युद्धपोत भी तबाह कर दिए।
ईरान पर हमले के विरोध में हिज्बुल्लाह ने देर रात इजरायल पर लेबनान से भीषण हमले करना शुरू कर दिया। इस दौरान रॉकेट और मिसाइल हमले किए किए गए, जिन्हें रोकने के लिए इजरायल ने पहली बार आयरन बीम (Iron Beam) का इस्तेमाल किया और हिज्बुल्लाह की ओर से दागे गए रॉकेटों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इजरायल के इस तकनीक को भविष्य में युद्ध को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है।
आयरन बीम एक ऐसी तकनीक है, जो मिसाइल के बजाय शक्तिशाली लेजर लाइट का इस्तेमाल करती है। इसकी लेजर किरण 300,000 किलोमीटर प्रति सेकंड (प्रकाश की गति) से चलती है। यह लेजर एक सिक्के के आकार जितनी पतली और सटीक होती है। यह सिस्टम दुश्मन के रॉकेट के इंजन या वॉरहेड पर 4-5 सेकंड तक 100kW की ऊर्जा डालता है, जिससे वह अत्यधिक गर्म होकर आसमान में ही फट जाता है।
अभी तक इजरायल अपने 'आयरन डोम' सिस्टम का इस्तेमाल करता था, जिसकी एक इंटरसेप्टर मिसाइल लाखों डॉलर की आती है। लेकिन आयरन बीम की सबसे बड़ी खूबी इसकी लागत है। इसकी कीमत करीब 2 डॉलर (करीब 170 रुपये) प्रति शॉट है। जब तक बिजली की सप्लाई है, यह लेजर काम करता रहेगा। इसमें मिसाइल खत्म होने का डर नहीं है।
इजरायल ने आयरन बीम का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए रफायल और एल्बिट सिस्टम्स जैसी कंपनियों के साथ 500 मिलियन डॉलर का नया कॉन्ट्रैक्ट किया है। यह सिस्टम अकेले काम नहीं करेगा, बल्कि आयरन डोम, डेविड स्लिंग और एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर सुरक्षा की एक अभेद्य दीवार बनाएगा।
हालांकि, घने बादल, धूल या खराब मौसम में लेजर किरण कमजोर पड़ सकती है। इसलिए इसे साफ मौसम और छोटे खतरों के लिए सबसे कारगर माना जा रहा है।
इजरायल को इस आयरन बीम को बनाने में 10 सालों से ज्यादा का वक्त लगा है। इसे पहली बार 2014 में दिखाया गया था। डेवलपमेंट और फाइनल टेस्टिंग पूरी होने के बाद सितंबर में इसे ऑपरेशनल घोषित किया गया था। पिछले साल दिसंबर में इजरायली सेना को इसे सौंप दिया गया था।
ये भी पढ़ें-
Explainer: ईरान क्यों कर रहा है अपने पड़ोसी देशों पर हमले? आखिर कहां है नजर? आसान भाषा में समझें